प्रतिक्रियाएँ

पत्रिका के प्रति पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

  • “I cannot understand Hindi and unable to compare it with widely speaking language English. But I can understand it’s in-depth knowledge and the way of its ability to combine those great people who have made India, a spiritual democratic country. As I came to know about Saarthak, an initiative of Bookcuriosity from my CIO Tony Patti, I can just say you people are doing great job. Wishing to have an interaction with Satyendra soon".

    - Kurt Koloseike, President & CEO, S.Walter Packaging Corp.

  • 'सार्थक' अभियान में मुझे भी शामिल करने हेतु कृतज्ञ हूँ। सार्थक' की प्रासंगिकता के हम कायल हुए। सहज अभिव्यक्ति

    - ऋषभदेव शर्मा ,कवि , समीक्षक, भाषा-विमर्शक, हैदराबाद

  • सार्थक के विश्व हिन्दी अंक के संपादकीय वीडियो को सुना । आपका लेखन तर्क पूर्ण होता है । आपका वक्तृत्व भी प्रभावकारी है, प्रेरक है । हिन्दी के दबते गुण और स्वरूपों को उभार कर प्रशस्त करने के लिए साधुवादI

    - ओम विकास , पूर्व निदेशक IIIT ,ग्वालियर ,पूर्व अध्यक्ष NAAC एवं NBA

  • 'सार्थक' (अंतरराष्ट्रीय मासिक वेब पत्रिका) का जनवरी 2016 का अंक 'विश्व-हिंदी विशेषांक' के रूप में प्रकाशित हुआ है. इस विशेषांक का संपादन डॉ. कविता वाचक्नवी ने किया है. हमारे लिए यह इसलिए और अधिक हर्ष की बात है क्योंकि वे कुछ वर्ष यहाँ हैदराबाद में रह चुकी हैं. हमें तो अब भी नहीं लगता कि वे कहीं दूर देश (अमेरिका) में हैं. 'सार्थक' के विश्व-हिंदी विशेषांक की सामग्री और प्रस्तुति डॉ. कविता वाचक्नवी की निजी पहचान के सर्वथा अनुरूप है. प्रसाद जी और प्रेमचंद जी का दुर्लभ युगल चित्र इस अंक को संग्रहणीय बनाने वाला है. संपादकीय में डॉ. वाचक्नवी ने कई महत्वपूर्ण बिंदु छुए हैं. जैसे- 1. भाषा अस्मिता का प्रतीक होती है. 2. भारत ने हिंदी को वह महत्ता नहीं दी जिसकी वह अधिकारी है. 3. बाजार की माँग पर हिंदी अपने बल पर विश्व पटल पर सबल हुई है. 4. हिंदी की शक्ति उसकी बोलियों के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं की समृद्धि से जुड़ी है. 5. विश्व-हिंदी विश्व भर में बसे भारतीयों की अस्मिता के भी प्रतीक के रूप में उभर रही है. मेरा यह सौभाग्य है कि इस विशेषांक में मेरे भी शोधपत्र को स्थान मिला है. इस हेतु मैं विशेषांक की संपादक के प्रति ऋणी अनुभव करती हूँ ।

    - गुर्रमकोंडा नीरजा, हैदराबाद

  • आज के सांस्कृतिक अराजकता और मूल्यों के विघटन के दौर में जहाँ पॉप कल्चर हावी होता जा रहा है,मातृ भाषा से दूरी बढ़ती जा रही है ,ऐसे में मातृ भाषा प्रेम को प्रोत्साहित करने की दिशा में "सार्थक" पत्रिका एक सार्थक पहल हैं |

    - नीरज चौधरी , कोलकाता

  • बहुत अच्छी पहल। यह पहल सार्थक हो। यह पहल उम्मीद की एक किरण है।

    - भीखी प्रसाद "वीरेन्द्र"

  • 'सार्थक' पत्रिका का जनवरी अंक पढ़कर बहुत अच्छा लगा.हिंदी से सम्बंधित लेख,विज्ञापनों में प्रयुक्त हिंदी प्रयुक्ति,कविता आदि सभी को ध्यान में रखकर मैं यह कह सकती हूँ कि एक ही अंक में इतना कुछ मिल गया तो आगे न जाने यह पत्रिका कितना ज्ञानवर्धन करेगी.तुलसीदास पर होनेवाली व्याख्यानमाला के विषय में पढ़कर अच्छा लगा सच में उनकी अवधि उनकी अपनी अवधि थी. इसके संपादकमंडल को बहुत बहुत बधाई.

    - कुसुम लता , दिल्ली

  • आपकी पत्रिका अत्यंत अच्छी लगी। कहानियां विशेषकर कादम्बरी जी की कृष्णा की चूड़िया बड़ी ही सुदर बन पड़ी हैं। आशा है अगले अंक में और भी कहानियां तथा कविताएं आएंगी।

    - उषा वर्मा, यॉर्क, ब्रिटेन

  • धन्यवाद मेरी रचना "बहेलिया और जंगल में आग को शामिल" करने के लिए। पत्रिका स्तरीय सामग्री से परिपूर्ण है .... हर तरह के विषयों को बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया है ......पत्रिका अपने नाम के अनुरूप ही सार्थक है। यह विशेषांक अपने विहित लक्ष्य को बहुत ही ईमानदारी से प्राप्त करती हुई प्रतीत होती है। संपादन कार्य बहुत ही सावधानी एवं सुरुचिपूर्ण ढंग से किया गया है। पढ़ना एक सुखद अनुभव से गुजरना है ।

    - नीरज कुमार नीर ,रांची

  • मैं यकींन के साथ कह सकता हूँ की "सार्थक" की सार्थकता निश्चित है | शुभकामनायें |

    - रविराज पटेल, कला समीक्षक ,लेखक ,फ़िल्मकार

  • बधाई आपको और आपकी पूरी टीम को।सार्थक एक सार्थक कदम है।शुभकामनाएँ |

    - आशुतोष सिंह

  • हिंदी की दशा-दिशा के विभिन्‍न पहलुओं को छूता हुआ यह बेहद ''सार्थक'' है। विषय वस्‍तु और विचारों के आयाम रोचक और संग्रहणीय हैं।

    - सिद्धार्थ नीर

  • वीडियो पर आपका वक्तव्य सुना , बहुत बधाई. राम-कथा बार-बार दोहराई जाने पर भी प्रिय लगती है तो "सार्थक" जैसी सार्थक पत्रिका लोकप्रिय अवश्य होगी. पत्रिका की सारगर्भित, उपयोगी सामग्री देख कर विस्मित हूँ।

    - पुष्पा सक्सेना, सिएटल, अमेरिका
  • बहुत कम समय में सहृदय पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल और "सार्थक" हो रही पत्रिका से जुड़ कर गर्व का अनुभव हो रहा है ।

    - कृष्ण श्रीवास्तव, कोलकाता

  • Thanks for coverage on Trinidad.

    - Indrani Rampersad (त्रिनिदाद)

  • 'सार्थक' के सार्थक अंक हेतु बधाई!

    - अश्विनीकुमार शुक्ल

  • • सार्थक का अंक देखा बहुत अच्छा लगा। आपको और समस्त संपादक मंडल को शुभकामनायें। जो लोग इस सुन्दर अंक में सम्मिलित हो पाये उन्हें भी बहुत मुबारकबाद |

    - मीना चोपड़ा, कैनेडा
  • सार्थक का विश्व हिन्दी अंक सचमुच सार्थक अंक है। सभी सामग्री स्तरीय है ओर सम्पादक मंडल की मेहनत,लगन को स्पष्ट करती है ।बधाई। निराला जी पर केन्द्रित अंक की प्रतीक्षा रहेगी।

    - संतोष श्रीवास्तव् , वरिष्ठ लेखिका, राजस्थान

  • मैं सार्थक पत्रिका का पाठक हूँ।यह पत्रिका मुझे बहुत आकर्षित करता है।मैं आप सभी को इस कार्य हेतु साधुबाद देता हूँ।

    - डॉ संजय प्रसाद श्रीवास्त, जे आर पी/लेक्चरर ग्रेड(हिंदी) भारतीय भाषा संस्थान,मैसूर